हिंदी विभाग की अकादमिक एवं साहित्यिक - सांस्कृतिक गतिविधियाँ की मीडिया रिपोर्ट

विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर शिवाजी कॉलेज में कार्यक्रम का आयोजन

शिवाजी कॉलेज हिन्दी विभाग की साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था *"साहित्य संगम"* द्वारा आज 10 जनवरी 'विश्व हिंदी दिवस' के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में *"हिंदी का राष्ट्रीय एवम् अंतर्राष्ट्रीय परिपेक्ष्य: संभावनाओं के द्वार"* विषय पर विशिष्ट व्याख्यान रखा गया। जिसमें वरिष्ठ पत्रकार *श्री राहुल देव* तथा रेल मंत्रालय से सेवानिवृत संयुक्त सचिव *श्री प्रेमपाल शर्मा* जी ने अपने विचार रखे। इस आयोजन में बड़ी संख्या में कॉलेज के शिक्षक और विद्यार्थी सम्मिलित हुए। श्री प्रेमपाल जी ने अपने वक्तव्य में पूरे देश में हिंदी भाषा के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि राजभाषा कोई भी हो लेकिन प्रजा भाषा अथवा लोक की भाषा हिंदी ही है। प्रश्न किसी भी भाषा में पूछा जाये लेकिन उत्तर हिंदी भाषा में ही सबको अच्छा लगता है। यही आवाज पूरे देश की है, सर्जनात्मक भाषा कोई भी हो सकती है लेकिन सृजनात्मकता हिंदी से है। वास्तव में उच्च शिक्षा और सिविल सेवाओं में हिंदी को बढ़ावा देने की ज़रूरत है। हमारे देश में आज भी भाषायी आधार पर विभाजन हो रखा है जैसे अभियंता और चिकित्सा की पढ़ाई हिंदी भाषा में नहीं है,जिसके कारण अपनी ही मातृभाषा को समझने और पढ़ने वाले लोग इस क्षेत्र के अध्ययन से अछूते रह जाते हैं। श्री शर्मा ने राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ तथाकथित नेता विभिन्न राज्यों में जाकर वहीं की भाषा का इस्तेमाल अपने भाषणों में करते हैं, लेकिन उस भाषा के विकास को लेकर उन्हें कोई चिंता नहीं है। यद्यपि हाल ही में कुछ सकारात्मक परिवर्तन भी हुए हैं, NEET परीक्षा हिंदी भाषा में शुरू हो गयी है और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) में हिंदी भाषा की मांग चल रही है, संभवतः बहुत जल्दी हो जाएगी।

कार्यक्रम में दूसरे प्रमुख वक्ता श्री राहुल देव जी ने विश्व हिंदी दिवस मनाए जाने के ऐतिहासिक कारणों की चर्चा की। उन्होंने इसके बारे में बताते हुए कहा कि 10 जनवरी 1975 में पहला विश्व हिंदी सम्मलेन नागपुर में आयोजित किया गया, उसके बाद सन 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की। अन्तर-राष्ट्रीय स्तर पर बात करते हुए कहा कि सयुंक्त राष्ट्र संघ में छ: भाषाएँ हैं जल्द ही हिंदी सातवीं भाषा बन सकती है। भाषा की उन्नति में भाषा के साथ उस समाज के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक विकास दोनों ही निर्भर होते हैं। भाषा हमारे आचरण तथा चेतना अदि को भी गढ़ती है, अगर हम भाषा बदलते हैं तो हमारी आकांक्षाएँ और महत्वाकांक्षाएँ सभी बदल जाती हैं। 150 साल में अंग्रेज़ी जानने वाले बमुश्किल 7 से 8 प्रतिशत लोग हैं, 90 से 95 प्रतिशत लोग आज भी अपनी -अपनी भाषाओ में ही जीवन जी रहे हैं। 20 साल बाद हम महाशक्ति बनेंगे यह निश्चित है, लेकिन ध्यान यह रखना है कि इंडिया बनकर या भारत बनकर।

इस कार्यक्रम में विभाग प्रभारी डॉ० वीरेंद्र भारद्वाज, प्राचार्या डॉ० शशि निझावन, उप-प्राचार्या अनीता कपूर तथा कॉलेज के अन्य शिक्षक भी मौजूद थे। अंततः इस कार्यक्रम में सभी ने यह संकल्प लिया कि हिन्दी को शक्ति-सम्पन्न और लोकप्रिय बनाने में हरसंभव सभी अपना योगदान देंगे।

हिंदी विभाग का संकाय संवर्धन कार्यक्रम ( एफ.डी.पी प्रोग्राम )

(रिपोर्ट)
19 और 20 जनवरी 2018 को हिंदी विभाग ने "सी बी सी एस पाठ्यक्रम अध्ययन के संदर्भ एवं पद्धतियां " विषय पर 2 दिनों का संकाय संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किया ।जिसमें कुल मिलाकर 4 सत्र रखे गए ।19 जनवरी को पहले सत्र में दो वक्ता प्रोफेसर भरत सिंह और प्रोफेसर रमेश गौतम जी ने अपने वक्तव्य रखे। हिंदी विभाग के प्रभारी श्री वीरेंद्र भारद्वाज जी ने अपने वक्तव्य में इस कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्य पर चर्चा करते हुए बताया कि सी. बी. सी.एस. पाठ्यक्रम के कुछ पेपरों को ध्यान में रखकर इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गयी है। प्रोफेसर भरत सिंह जी ने हिंदी भाषा और उसके उद्भव और विकास और उसके समाज के साथ संबंध विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए और दैनिक जीवन के कार्यों से उदाहरणों को लेते हुए भाषा और समाज के अंतर्संबंध को समझाया । प्रोफेसर रमेश गौतम जी ने नाटक और रंगमंच की परंपरा को समझाते हुए नए प्रयोगों की आवश्यकता और महत्व की बात की। दूसरे सत्र में प्रोफेसर सत्यकेतु सांकृत जी ने आधुनिकता को समझाते हुए आधुनिक हिंदी कविता के नए विषय और नए विचारों को सामने रखा उसी सत्र में प्रोफेसर पूरनचंद टंडन जी ने रीतिकाल की प्रासंगिकता पर अपने विचार प्रस्तुत किए वही प्रोफेसर रमेश चंद्र शाह जी ने भक्ति काल की महत्ता को स्पष्ट किया l दूसरे दिन 20 जनवरी को पहले सत्र में आज की प्रमुख कथाकार नासिरा शर्मा जी ने स्त्री विमर्श पर चर्चा करते हुए बताया कि स्त्री का महत्व उसके अस्तित्व में है ना कि मर्दो के पीछे मर्द बनकर रहने में औरत के जो गुण हैं अगर वह उन्हीं को अपनाएं तो शायद स्त्री अपने सही मायनों में स्त्री होगीl जैसे मर्द गाली बकते हैं तेरी भी गाली बकी तो यह उसके लिए अच्छा नहीं होगा l हमें अध्यापक होने के नाते बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए और एक अच्छे अध्यापक के क्या कर्तव्य हैं इस पर भी उन्होंने विस्तार पूर्वक चर्चा करें वही पहले सत्र में अजय नावरिया जी ने दलित विमर्श के कुछ ज्वलंत मुद्दों पर बेबाक अपनी दृष्टि डाली और बताया कि दलित विमर्श को पढ़ाते समय किन किन बिंदुओं को ध्यान में रखना चाहिए और कुछ अच्छी पुस्तकें भी इस विषय पर पढ़ने के लिए बताई lदूसरे सत्र में जाने-माने मीडिया विशेषज्ञ और दिल्ली विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्रो. वाइस चांसलर रहे श्री सुधीश पचौरी जी ने मीडिया और लोक साहित्य पर बात करी और ज्वलंत मुद्दे पद्मावत फिल्म पर भी अपने विचार प्रस्तुत किए l वहीं हिंदी विभाग की प्रोफेसर सुधा सिंह ने विज्ञापन और सोशल मीडिया विषय पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। सभी वक्ताओं ने अपने विषयों पर गंभीरता पूर्वक चर्चा करते हुए बताया कि इन विषयों को किस तरह से पढ़ाया जाए,कक्षा में पढ़ाते समय किन बारीकियों पर ध्यान केंद्रित किया जाए और पढ़ाने में आने वाली चुनौतियों से कैसे निपटा जाए। अपने विद्यार्थियों को इस विषय के साथ कैसे जोड़ा जाए इत्यादि तमाम बारीकियों पर विस्तार पूर्वक चर्चा करी और प्रश्नोत्तर शैली के साथ सभी प्रतिभागियों से चर्चा करते हुए कार्यक्रम को जीवंतता प्रदान की।इस कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के लगभग 40 कॉलेजों के 87 प्राध्यापकों ने भाग लिया और पूरे 2 दिनों तक हिंदी विभाग के 14 प्राध्यापकों ने पूरे जोर-शोर से इस कार्यक्रम का आयोजन बहुत ही बखूबी रुप से निभाया कार्यक्रम का संचालन विभाग की प्राध्यापिका सुश्री ज्योति शर्मा जी ने किया।

शिवाजी कॉलेज में स्वामी विवेकानंद पर केन्द्रित विशेष व्याख्यान का आयोजन

(रिपोर्ट)
आज दिनांक 28 जनवरी 2018 को शिवाजी महाविद्यालय में हिंदी 'साहित्य संगम' तथा 'विवेकानंदम' के संयुक्त तत्वावधान में स्वामी विवेकानंद पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। "स्वराज्य के परिपेक्ष्य में स्वामी विवेकानन्द के विचार " विषयक व्याख्यान में भारत की सबसे पुरानी राष्ट्रवादी पत्रिका 'ऑर्गनाइजर' के सम्पादक श्री प्रफुल्ल केतकर जी ने विशिष्ट व्याख्यान दिया। श्री केतकर जी ने अपने वक्तव्य में बताया कि विवेकानंद जी के लिए स्वराज्य का मतलब सिर्फ अंग्रेजों को भगाना ही नही था उनके लिए वो सभी विषय भी स्वराज्य के दायरे में आते हैं जिनके कारण हमारा स्वराज्य चला गया था। जैसे -जाति-पांति के कारण भेदभाव, धार्मिक भेदभाव ,अस्पृश्यता आदि। वेदांगो को स्वराज्य से सम्बन्ध स्थापित करते हुए कहा की वेदांगों को काल और परिस्थिति के अनुसार उसको अलग-अलग दृष्टिकोणों से व्याख्यायित किया जाता रहेगा और उनकी उदात्तता तथा आवश्यकता हमेशा बनी रहेगी ।"माता भूमि पुत्रो अहं पृथिव्या" से राष्ट्र और राष्ट्रीयता को व्याख्यायित किया । भारत की समस्याओं को भारतीय ढंग से तथा भारत की योजनाओं को भारतीय नीतियों से संचालित किये जाने की बात की। सहिष्णुता के सन्दर्भ में बताया कि-"मेरा ही " नही " मेरा भी " के विचार और व्यवहार प्रदर्शित करना ही सहिष्णुता है। पाश्चात्य संस्कृति पर बात करते हुए कहा कि वहाँ व्यक्तिकता हावी है वहाँ व्यक्तिगत स्वतंत्रता ज्यादा महत्वपूर्ण है, परन्तु भारतीय संस्कृति में समाज और उसका उत्थान प्रमुख है। इस सन्दर्भ में कई उदाहरण देते हुए उन्होंने अपने विचार रखे। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए। इस संगोष्ठी में शिवाजी महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ० शशि निझावन ,हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ० वीरेन्द्र भारद्वाज ,साहित्य संगम के संयोजक डा० दर्शन पाण्डेय तथा विवेकानन्दम् के संयोजक डॉ० हेमंत कुशवाहा समेत विभिन्न कॉलेज़ों के कई शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

शिवाजी कॉलेज, हिंदी विभाग द्वारा विश्व मातृभाषा दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन

(रिपोर्ट)
वास्तव में मातृभाषा मानव के संस्कारों की संवाहक होती है, मातृभाषा के बिना किसी भी संस्कृति की कल्पना नहीं की जा सकती। मातृभाषा व्यक्ति को राष्ट्र और राष्ट्रीयता से जोड़ती है तथा समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती है। ऐसे में इस दिवस को उत्सव के रूप में मनाना बेहद ज़रूरी है।

इसी आवश्यकता को मान्य करते हुए आज शिवाजी कॉलेज के हिंदी विभाग की साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था 'साहित्य संगम' ने विश्व मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में 22 फरवरी 2018 को अंतरमहाविद्यालयी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। इस अवसर पर दो तरह की प्रतियोगिताएँ हुईं। सृजनात्मक लेखन प्रतियोगिता एवं वाद विवाद प्रतियोगिता।

यद्यपि यह कार्यक्रम 21 फ़रवरी को होना था, किन्तु इसी दिन पूरे कॉलेज में खेल दिवस का आयोजन किया गया,जिस कारण इसे अगले दिन 22 फ़रवरी को आयोजित करने का निर्णय लेना पडा। इस कार्यक्रम में दिल्ली के 20 विभिन्न महाविद्यालयों से 100 से भी अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। सृजनात्मक लेखन प्रतियोगिता में रामलाल कॉलेज की श्रेया उत्तम ने प्रथम स्थान, शिवाजी कॉलेज के पृथ्वी ने द्वितीय स्थान तथा आत्माराम सनातन धर्म के अनिल चौधरी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीँ वाद-विवाद प्रतियोगिता में शिवाजी कॉलेज से राजनीति विज्ञान के विद्यार्थी दिग्विजय विश्वकर्मा ने प्रथम स्थान, किरोड़ीमल कॉलेज के हर्षित ने द्वितीय तथा शिवाजी कॉलेज की शिवानी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम का संयोजन हिंदी विभाग के प्राध्यापक तथा साहित्य संगम के संयोजक डॉ० दर्शन पाण्डेय के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। विभाग प्रभारी डॉ वीरेन्द्र भारद्वाज सहित विभाग के अन्य सभी प्राध्यापकों की भी पूर्णतया सहभागिता रही। कार्यक्रम के अंत में कॉलेज की प्राचार्या डॉ० शशि निझावन ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए पूरे हिंदी विभाग को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

भक्ति काव्य की प्रासंगिकता पर शिवाजी कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। 16 मार्च 2018

(रिपोर्ट)
'भक्ति काव्य कभी अप्रासंगिक नहीं हो सकता'-प्रो० करुणाशंकर उपाध्याय
शिवाजी कॉलेज, हिंदी विभाग की साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था साहित्य संगम के तत्त्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय 'भक्तिकालीन काव्य: समसामयिक संदर्भ' रखा गया। राष्ट्रगान एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ प्रथम सत्र का आरंभ हुआ। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुधीर प्रताप सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि निर्गुण काव्य का समसामयिक संदर्भ बिना आज की समस्याओं को केंद्र में रखे पूरा नहीं होता। उन्होंने कहा कि आरक्षण का सवाल ऐसा ही मुद्दा है। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर अनिल राय ने कहा कि निर्गुण काव्य केवल काव्य नहीं है बल्कि उसमें जीवन के सर्वांगीण पक्षों को देखा जा सकता है। वहीँ बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में सह प्रोफेसर डॉ. पुनीत बिसारिया ने अपने विचार रखे इस सत्र की अध्यक्षता मुंबई विश्वविद्यालय के प्रोफेसर करुणाशंकर उपाध्याय ने सगुण काव्य की समसामयिकता पर विचार करते हुए भक्तिकाल की संदर्भ सापेक्षता पर बल दिया। साथ ही कहा कि आज की समस्याओं का भक्ति काव्य में भी चित्रण हुआ है और तुलसी जैसे कवि ने समाधान का रास्ता भी सुझाया है। तुलसी का समन्वयवाद संघर्ष प्रबंधन (स्ट्रेस मैनेजमेंट) का सबसे अच्छा उपाय है। उन्होंने कहा कि भक्ति काव्य कभी अप्रासंगिक नहीं हो सकता, क्योंकि उसमें जो प्रश्न उठाए गए हैं वे हमारे समय में आज और भी प्रभावी रूप में उपस्थित हैं। आज के कार्यक्रम की खासियत इसकी सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी रही। जिसके तहत हिंदी विभाग के छात्रों ने रामकुमार वर्मा की एकांकी दीपदान पर आधारित लघुनाटिका प्रस्तुत की। जिसने छात्रों और अध्यापकों का मनमोह लिया। अंत में संगोष्ठी संयोजक डॉ० दर्शन पाण्डेय ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम सभी आमंत्रित वक्ताओं का आभार व्यक्त किया। कॉलेज की प्राचार्या डॉ शशि निझावन ने कार्यक्रम की सराहना की। विभाग प्रभारी डॉ वीरेन्द्र भारद्वाज सहित हिंदी विभाग के सभी शिक्षक कार्यक्रम में अंत तक मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन विभिन्न नृत्य एवं गायन गतिविधियों से हुआ इसमें हिंदी विभाग के छात्रों ने अपनी प्रस्तुति दी।

एलुमनाई मीट कार्यक्रम

दिनांक 25 मार्च 2018 को शिवाजी कॉलेज के हिंदी विभाग ने अपने पूर्व विद्यार्थियों (हिंदी विशेष) के साथ प्रथम बार एलुमनाई मीट का आयोजन किया। लगभग 100 से अधिक पूर्व विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन विभाग प्रभारी एवं पूर्व विद्यार्थी डॉ वीरेन्द्र भारद्वाज ने किया। इस अवसर पर विभाग के सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. वीरेन्द्र नाथ मिश्र तथा डॉ उषा कांता चतुर्वेदी भी मौजूद रहे। अधिकांश लोगों ने कॉलेज से जुड़े अपने अनेक अनुभव साझा किए। अपने शिक्षकों से मिलकर पूर्व विद्यार्थी फूले नहीं समाए और अपने विद्यार्थियों से मिलकर शिक्षकों को हार्दिक सुख और प्रसन्नता की अनुभूति हुई। कार्यक्रम बेहद सफ़ल रहा।

इस कार्यक्रम में हिंदी विशेष में पढ़ रहे विद्यार्थियों द्वारा रामकुमार वर्मा लिखित 'दीपदान' नाटक की शानदार प्रस्तुति की गई। इसके अलावा एक समूह लोक नृत्य और एकल नृत्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

एलुमनाई मीट कार्यक्रम का संयोजन करने का दायित्व डॉ० दर्शन पाण्डेय ने निभाया। इस अवसर पर विभाग के लगभग सभी प्राध्यापक मौजूद रहे। समग्र रूप से यह बेहद शानदार, लाज़वाब और अविस्मरणीय दिन रहा।

विभाग की विभिन्न गतिविधियों की संक्षिप्त वार्षिक रिपोर्ट (2017-18)

Department of Hindi organized FDP

  • Department of Hindi organized two day Faculty Development Program on the topic of "CBCS Pathyakram: adhyayan ke sandarbh evam paddhtiyan" on 19th and 20th January 2018
  • Eminent speakers like Pro. Ramesh Gautam, Pro. Sudhish Pachauri, Smt. Nasira Sharma, Pro. Bharat Singh, Pro. P.C Tondon, Pro. Ramesh Chandra Mishra, Pro. Sudha Singh, Pro. Satyaketu Sankrit, and Dr. Ajay Navriya shared their views with 100 of faculty members of different colleges.

Department of Hindi organized lectures by

  • Mr. Rahul Dev (Senior Journalist) and Mr. Prempal Sharma (Retd. Joint Secretary, Indian Railway) on the topic: "Hindi ka Rashtriya aur Antarashtriya Pariprekshya : Sambhavnao ke dwar" on the occasion of World Hindi Day on 10th January, 2018
  • Mr. Prafull Ketkar (Editor, Organizer) on "Swaraj ke pariprekshya me Swami Vivekanand ke vichar" on 28th January, 2018

Department of Hindi organized Inter-college Competitions

  • On the occasion of Hindi Diwas and Vishva Matribhasha Diwas Sahitya Sangam(Cultural and literary Society of Hindi Department) organized Creative Writing and Debate competition on 14th september, 2017 and 22th February, 2018 respectively.

Department of Hindi organized an academic excursion tour for Kurukshetra on 17th November, 2017
Eminent speakers visited Department of Hindi:

S.No Name Of Guest Designation Affiliation Departmental Activity invited for
1. Prof. Ramesh Gautam Former Director ILLL DU FDP
2. Prof. Sudhish Pachauri Former Pro VC DU FDP
3. Prof. Bharat Singh PROFESSOR KHS FDP
4. Prof. P.C Tondon PROFESSOR DU FDP
5. Prof. Ramesh Chandra Mishra (F)PROFESSOR DU FDP
6. Prof. Satyaketu Sankrit PROFESSOR Ambedkar University FDP
7. Nasira Sharma Eminent Writer Sahitya Academi Awardee FDP
8. Prof. Sudha Singh PROFESSOR DU FDP
9. Mr. Rahul Dev Senior Journalist Parliamentry committee SAHITYA SANGAM
10. Mr. Prempal Sharma Former Joint Secretary Indian Railway SAHITYA SANGAM
11. Mr. Prafull Ketkar Editor ORGANISER SAHITYA SANGAM
12. Dr. Ajay Navariya Associate Professor JMI FDP