Hindi: Achievements

हिन्दी-विभाग : उपलब्धियाँ

डॉ॰ उषाकांता चतुर्वेदी

डॉ॰ चतुर्वेदी सन 1988 से हिन्दी विभाग में अध्यापन कार्य कर रही हैं, वर्तमान में विभाग की सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं तथा एसोसिएट प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं। कॉलेज की विभिन्न समितियों में निरंतर कार्य करती रहीं हैं। 2010-14 के दौरान मैगज़ीन कमेटी, Prospectus कमेटी तथा साहित्य संगम की संयोजक रहीं ,जिसके अंतर्गत कॉलेज की छात्र पत्रिका, संगोष्ठी एवं नाट्य प्रस्तुति का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इनकी वर्ष 2012 में ‘सलाखों के भीतर रिश्ते’ नामक कहानी प्रकाशित हुई। वर्तमान में फ़ैकल्टी ऑफ आर्ट्स ,दिल्ली विश्वविद्यालय की सदस्य भी हैं। मानव संसाधन मंत्रालय केन्द्रीय हिंदी संस्थान के अंतर्गत एक परियोजना कार्य से जुड़ीं हुई हैं जो विश्व हिंदी कोश तैयार कर रही है।

डॉ सर्वेश कुमार दूबे

औपचारिक शिक्षा के दौरान एम.ए. हिन्दी में द्वितीय स्थान प्राप्त किया. इनकी आठ पुस्तकें प्रकाशित हैं . इसमें से पहली पुस्तक परिचय आई.ए.एस. की परीक्षा में संस्कृत चयन करने वाले अभ्यर्थियों के लिए आधार पुस्तक है. कॉलेज में तीन बार हिन्दी विभाग संयोजक और एक बार प्रबंध समिति में अध्यापक प्रतिनिधि के रूप में काम किया ।

डॉ॰ रुचिरा ढींगरा

डॉ॰ रुचिरा 1990 से हिन्दी विभाग में अध्यापन कर रही हैं, वर्तमान में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। कॉलेज की विभिन्न समितियों में सदस्य के रूप में निरंतर कार्य करती रहीं हैं। वर्ष 2010-14 के दौरान इन्होंने पाठ्यक्रम से संबन्धित पाँच पुस्तकों का सम्पादन, दो पुस्तकों में सह-लेखन किया है। इसके अतिरिक्त दो पुस्तकों में दो शोध आलेख तथा विभिन्न राष्ट्रीय संगोष्ठियों में लगभग चार शोधपत्र प्रस्तुत किए हैं। वर्ष 2014-15 में दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त Innovation प्रोजेक्ट को भी सफलतापूर्वक सम्पन्न किया है। कई सामाजिक- सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़कर समाज सेवा का कार्य भी कर रही है। इसके लिए 2013 में अखिल भारतीय स्वतंत्र लेखक मंच , मॉडल टाउन से विशिष्ट प्रशस्ति पत्र (सरस्वती रत्न सम्मान) प्राप्त।

डॉ॰ वीरेंद्र भारद्वाज

डॉ॰ भारद्वाज हिन्दी विभाग में लगभग 21 वर्षों से अध्यापन कार्य कर रहे हैं, वर्तमान में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं। हंकुक विश्वविद्यालय, सियोल (साउथ कोरिया) में भी एक वर्ष विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में अध्यापन किया। दिल्ली विश्वविद्यालया के दो बार एकेडमिक कौंसिल के सदस्य रहने के साथ-साथ शिक्षक संगठन DUTA एवं FEDKUTA के सचिव भी रहे। यू.जी.सी और दिल्ली विश्वविद्यालय से संबंधित कई पाठ्यक्रम निर्माण समितियों में सदस्य रहे। उच्च शिक्षा में सुधार से संबंधित कई समितियों के सदस्य होने के अलावा शोध कार्यों तथा शोध-निर्देशन में निरंतर सक्रिय रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से इनके निर्देशन में एक शोधार्थी ने Ph.d. की उपाधि प्राप्त की है तथा 6 अन्य शोधार्थी शोधरत हैं। वर्ष 2010-14 के दौरान डॉ॰ भारद्वाज की तीन पुस्तकें तथा सात से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हुए है। डॉ. वीरेंद्र भारद्वाज के समसामयिक विषयों पर भी लेख राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं।

डॉ. विकास शर्मा

हिंदी विभाग में 2008 से असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। इन्होंने वर्ष 2014 में दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी पी.एचडी की उपाधि प्राप्त की। ये सत्र 2012-13 में विभाग प्रभारी रहे। वर्ष 2011 से 2014 तक कॉलेज की एन-एब्लिंग यूनिट के संयोजक रहे। वर्ष 2011 में इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ओरिएंटेशन और रिफ्रेशर कोर्स किये। वर्ष 2010 से 2012 तक साहित्य संगम के संयोजक रहे। इन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में कई सेमिनार अटेंड किये और कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इनके अब तक 4 लेख पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं । अनुजीवामि पत्रिका के ये मुख़्य संपादक रहे ।

डॉ. ज्योति शर्मा

हिन्दी विभाग में लगभग 9 वर्षों से अध्यापन कार्य कर रही हैं,वर्तमान में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं | ‘स्विट्जरलैंड विश्वविद्यालय’ में एक सत्र के लिए विज़िटिंग प्रोफेसर के रुप में अध्यापन कार्य किया | उच्च शिक्षा निदेशालय,भारत सरकार; द्वारा 2013 में ‘कॉलेज व्याख्याता पुरस्कार’ (Best Lecturer Award) से सम्मानित| रेडियो और दूरदर्शन के विविध कार्यक्रमों में प्रवक्ता के रुप में निरंतर आमंत्रित| दिल्ली विश्वविद्यालय के कम्युनिटी रेडियो स्टेशन के साथ लम्बे समय तक सक्रिय जुड़ाव रहा| दिल्ली विश्वविद्यालय के इनोवेशन प्रोजेक्ट पर विषय-‘Doing Nothing: The Invisible work of women ‘पर कार्य संपन्न किया| देश-विदेश में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विचार गोष्ठियों में सक्रिय भागीदारी और पी.पी.टी. प्रस्तुति की| नाटक-रंगमंच, मीडिया , भाषा ,साहित्य और समाज की अन्य गतिविधियों पर पुस्तक और विविध लेख देश-विदेश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित |ज्योति की ज्योत्सना ब्लॉग का सफल संचालन कर रही हैं| कॉलेज की विविध कमेटियों में, सांस्कृतिक-साहित्यिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी|कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से जनसंचार में पी.जी. डिप्लोमा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण. छात्र जीवन के दौरान एम.फिल् प्रवेश परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त. एम.ए.परीक्षा में उच्चतम स्थान के लिए 2005 के – ‘दिल्ली विकास प्रतिभा पुरस्कार’ से सम्मानित| बी.ए.परीक्षा परिणाम और विविध वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में सर्वोच्च प्रदर्शन के लिए हंसराज कॉलेज द्वारा 2002 में “बहुमुखी प्रतिभासंपन्न छात्रा” के सम्मान से सम्मानित| अनुसंधान और अध्यापन के क्षेत्र में सक्रिय रुप से कार्यरत हैं |

डॉ॰ दर्शन पाण्डेय

डॉ॰ दर्शन पाण्डेय हिन्दी विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में पिछले 13 वर्षों से अध्यापन कार्य कर रहे हैं। हिन्दी नाटक और मीडिया इनके अध्यापन के मुख्य क्षेत्र हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से एम॰ए॰, एम॰फ़िल॰,पीएच॰ डी॰ (हिन्दी) की उपाधि प्राप्त की है। जबकि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से जनसंचार में एम॰ए॰ की डिग्री प्राप्त की है। वर्ष 2013-14 में कार्यवाहक तथा 2014-15 में हिन्दी विभाग के प्रभारी के रूप में कार्य किया। शैक्षणिक सत्र 2010-14 के दौरान विभिन्न महाविद्यालयों में कई संगोष्ठियों में भाग लेने के साथ- साथ इनकी दो पुस्तकें एवं दो शोध लेख प्रकाशित हुये, एक अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार तथा एक राष्ट्रीय सेमीनार में शोधपत्र प्रस्तुत किए। वर्ष 2013-14 में साहित्य संगम के संयोजक के रूप में कार्य करते हुये सफलतापूर्वक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया।

डॉ. सरिता

डॉ. सरिता तदर्थ प्रवक्ता (हिन्दी) के रूप में 1-8-2011 से शिवाजी कॉलेज के हिन्दी–विभाग में कार्यरत हैं। इन्होंने बी.ए., एम.ए. (हिन्दी), एम.फिल व पी–एच.डी. की शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से ही अर्जित की है। इनकी एक पुस्तक “सूफी काव्य परम्परा और काशिमशाह” वर्ष 2013 में प्रकाशित हुई। विभिन्न राष्ट्रीय–अंतर्राष्ट्रीय पत्र–पत्रिकाओं जैसे Golden Research Thoughts, अनभै साँच व मरू व्यवसाय चक्र आदि में ‘रीति इतरकाव्य और समाज‘, ‘घाघ का कृषि वर्णन ‘ तथा कविता में खाद्यान्न और अकाल वर्णन’ शीर्षक से शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं। इन्होंने I.P. College DU (वर्ष 2011), Hansraj College DU (वर्ष 2011), C.P.D.H.E. DU (2014) में आयोजित विभिन्न सेमीनारों व कार्यशालाओं में भाग लिया।

अरविंद कुमार यादव

अरविंद कुमार यादव शिवाजी कॉलेज के हिंदी विभाग में तीन साल से तदर्थ प्रवक्ता के रूप में कार्यरत है ! इन्होंने सन 2015 में दिल्ली विश्वविद्यालय से डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त की । साथ ही शैक्षिक गतिविधि के रूप में वर्ष 2013 में इनके तीन शोध पत्र विभिन्न पत्रिकाओ में प्रकाशित हुए। साथ ही दो शोध पत्र नेशनल सेमिनार में भी प्रस्तुत और प्रकाशित हैं। इसके अलावा एक इन्टर नेशनल सेमिनार पांच नेशनल सेमिनार एवं दो कार्यशालाओं में भी भाग लिया है।

डॉ. कंचन

डॉ. कंचन पिछले ढाई वर्षों से हिंदी विभाग में तदर्थ सहायक प्रोफेसर के पद पर कर्यरत हैं। इन्होंने स्नातक,स्नातकोत्तर ,एम.फिल.,पीएच.डी.की उपाधि दिल्ली विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। हिंदी नाट्य-साहित्य के क्षेत्र में इनकी विशेष रूचि है। वर्ष 2013 में इनकी पुस्तक “भीष्म साहनी के नाटक :युग और साक्ष्य “ प्रकाशित हुई। वर्ष 2013-14 में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में विविध विषयों पर इनके लेख प्रकाशित हुए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विभिन्न संगोष्ठियों और कार्यशालाओं में भी इन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया है।

श्री अशोक कुमार मीणा

श्री अशोक कुमार मीणा हिन्दी विभाग में तदर्थ सहायक प्रोफेसर के पद पर जुलाई, 2014 से कार्यरत हैं । इन्होंने स्नातक उपाधि राजस्थान विश्वविद्यालय से, स्नातकोत्तर तथा एम. फिल. की उपाधि दिल्ली विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। ‘हिन्दी का अस्मितामूलक नाट्य-साहित्य ; समाज और राजनीति के प्रश्न’ विषय पर दिल्ली विश्वविद्यालय से पी.एच.डी. की उपाधि के लिए शोधरत हैं। वर्ष 2014-15 में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में इनके कई लेख प्रकाशित हो चुके हैं। इन्होंने विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में भी भाग लिया है।

छात्र उपलब्धियाँ:-

कपिल कौशिक हिंदी तृतीय वर्ष के छात्र द्वारा सी वी एस महाविद्यालय में वाद विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया|
संदीप हिंदी तृतीय वर्ष के छात्र द्वारा एन सी सी कैंप में  रजत पदक प्राप्त किया गया |
छात्रा नीलम द्वारा शिवाजी माहविद्यालय में रंगोली प्रतियागिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया गया |